Tuesday, March 3, 2009

भेदभाव भरी अमेरिकी बेरोजगारों की जिंदगी!

Published in 03 Mar-2009 Print Edition of नईदुनिया
अमेरिका का पूंजीवादी समाज इस बात पर गर्व करता रहा है कि यहां समृद्ध होने के लिए सबको "समान अवसर" प्राप्त हैं। ऊंचे और अच्छे वेतन के साथ आकर्षक बोनस पाने वाले सीईओ और उसी कंपनी के एक सामान्य कर्मचारी की आमदनी में आकाश-पाताल का फर्क होने के बावजूद एक आम अमेरिकी भेदभाव के समाजवादी नारे को नजरअंदाज कर संतोष की जिंदगी जीना चाहता है।

आर्थिक संकट के दौर में यह सच्चाई कड़वी लगती है कि डूबते बैंकों के आला अफसरों को लाखों डॉलर बोनस मिले जबकि महीनों से बेरोजगार आम आदमी बची-खुची पूंजी भी खत्म करने के कगार पर पहुंच जाए। अमेरिकी श्रम विभाग चार महीने से ज्यादा समय तक बेरोजगारी भत्ता नहीं देता। बड़े अफसरों को नौकरी छोड़ने के बदले लाखों डॉलर के मुआवजे की जानकारी मिलते ही राष्ट्रपति ओबामा ने घोर आपत्ति जताई। दिवालिया होने की कगार पर खड़े इन बैंकों में ओबामा सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई थी। ओबामा ने करोड़ों डॉलर की आर्थिक सहायता तो मुहैया कराई लेकिन अफसरों को लाखों डॉलर बोनस देने के लिए उन कंपनियों को फटकार भी लगाई।

घाटे का समाना करने वाले न्यूयॉर्क के सैकड़ों वित्तीय संस्थानों और बैंकों ने सिर्फ बोनस के रूप में लगभग २० करोड़ डॉलर अपने बड़े अफसरों को बांटे। यहां कुछ उदाहरण देना उचित होगा। विश्व प्रसिद्ध बैंक "सिटी गु्रप" के चीफ एक्जीक्यूटिव विक्रम पंडित को ३२ लाख डॉलर और चेयर मैन सेनफॉर्ड विल को दस लाख डॉलर सालाना बोनस मिलता था जबकि जनरल मोटर्स के सीईओ को ११७ लाख डॉलर। यह वही सिटी बैंक था जिसने घाटे से निबटने के लिए सिंगापुर के निवेशकों का दरवाजा खटखटाया था।

कहते हैं कि अमेरिकी समृद्धि का रहस्य यहां की सख्त "वर्क कल्चर" में छिपा है। शायद यह कल्चर सिर्फ छोटे तबके के लोगों के लिए ही बना है। यूरोप सहित दुनिया के अधिकांश देशों में पूरे साल में एक महीने की अर्जित छुट्टी मिल सकती है लेकिन अमेरिका के कामगारों को सिर्फ दो हफ्ते की। यदि आप पांच साल से अधिक किसी कंपनी में काम कर रहे हो तो आप को तीन हफ्ते की अर्जित छुट्टी मिल सकती है। और चार हफ्ते की छुट्टी पाने के लिए आप की नौकरी कम से कम १० साल की होनी चाहिए। इसके अलावा आप सिर्फ दो दिन का आकस्मिक अवकाश ले सकते हैं।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उधार की शर्तें तो बड़ी सहज कर दी गईं लेकिन नौकरी की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं मिली। एक लाख सालाना से ज्यादा वेतन पाने वाले आईटी विशेषज्ञों ने उधार पर मकान और शान-शौकत भरी जिंदगी जीने के लिए महंगी गाड़ी खरीद ली। उन्हें क्या पता था कि उधार की जिंदगी का जलवा उस दिन अचानक धूमिल हो जाएगा जब उनकी नौकरी चली जाएगी और किस्तें या कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाएगा!

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