Monday, February 9, 2009

क्या बुश को कठघरे में खड़ा करेंगे ओबामा

9 फरवरी 2009, नवभारत टाइम्स में प्रकाशित
न्यू जर्सी से अशोक ओझा
अमेरिकी राष्ट्रपति का पद भार संभालते ही ग्वांतनामो बे और सीआईए की सभी गुप्त जेलों को एक साल के भीतर बंद करने का नीति निर्देश जारी कर बराक ओबामा ने अपने चुनावी वादों को पूरा किया है, लेकिन अमेरिका में यह विवाद शुरू हो गया है कि ग्वांतनामो को बंद करने से कहीं देश की सुरक्षा तो खतरे में नहीं पड़ जाएगी। रिपब्लिकन और कंजरवेटिव नेता यहां तक कहने लगे हैं कि ग्वांतनामो के खतरनाक कैदियों को अमेरिका की सिविलियन जेलों में भेजने से स्थानीय लोग असुरक्षित हो जाएंगे।
भूतपूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और उनकी तिकड़ी के सदस्य उपराष्ट्रपति डिक चेनी और रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफेल्ड ने यातना के तौर-तरीकों के समर्थन में अपने अधिकारियों को गुपचुप आदेश जारी किए थे, जिनसे अब पर्दा उठ रहा है। चेनी ने यहां तक कहा कि उन्हें ग्वांतनामो में जांच-पड़ताल के लिए इस्तेमाल में लाए गए सभी तौर-तरीकों, खास तौर पर वॉटर बोर्डिन्ग के बारे में जानकारी थी। चेनी का मत है कि पूछताछ के इन तरीकों से ही अमेरिका को इतने सालों तक आतंकी हमलों से सुरक्षित रखा जा सका है। परोक्ष रूप से चेनी यह कहना चाहते होंगे कि अगर ओबामा सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में उनकी और बुश की बनाई नीतियों को बदलने की कोशिश की तो अमेरिका की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
9/11 के षड्यंत्र में शामिल और अल कायदा व तालिबान से जुडे़ तथाकथित आतंकवादियों पर 'एनमी कांबैटेंट' का ठप्पा लगा कर सैकड़ों लोगों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों से पकड़ा गया और अमेरिकी सीमा से बाहर कैद कर दिया गया। सालों तक इन कैदियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत इकट्ठा करने की कोशिश में उन्हें यातनाएं दी गईं। इन यातनाओं में सबसे अधिक आपत्तिजनक थी वॉटर बोर्डिन्ग। कैदियों को यातना देने की यह ऐसी विधि है, जिसमें कैदी का सिर पानी में तब तक डुबाया जाता है जब तक कि वह सांस लेने के लिए व्याकुल न हो जाए और डूबने जैसा न महसूस करने लगे। अंतरराष्ट्रीय नियमों और जिनीवा कन्वेंशन के तहत वॉटर बोर्डिन्ग को यातना की प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है।
रिपब्लिकन और कंजरवेटिव खेमे के लोग ग्वांतनामो और सीआईए की गुप्त जेलों में कैदियों के साथ बरती जाने वाली यातना की खबरों को नजरअंदाज करते हुए आम लोगों को यह विश्वास दिलाने में लगे हैं कि देखिए, इन उपायों के कारण ही 9/11 के बाद अमेरिका में कोई आतंकवादी हमला नहीं हुआ। अगर अंतरराष्ट्रीय कानून या जिनीवा कन्वेंशन को ताक पर रखकर अमेरिका को आतंकवाद से मुक्त रखा जा सकता है, तो इसमें बुराई क्या है। ऐसा कहकर वे न केवल बुश की नीतियों को सही ठहराना चाहते हैं, बल्कि यह भी साबित करना चाहते हैं कि बुश ने एफबीआई और सेना के जांच अधिकारियों को कैदियों से पूछताछ के लिए अत्यधिक बल प्रयोग की इजाजत देकर अमेरिकी संविधान का उल्लंघन नहीं किया।
ओबामा दुनिया में अमेरिका की छवि सुधारने के लिए वचनबद्ध हैं। भूलना नहीं चाहिए कि अमेरिकी सेनेट में ओबामा ने बुश को युद्ध करने का अधिकार देने के प्रस्ताव के विरुद्ध वोट किया था। उन्होंने अपने भाषणों में स्पष्ट किया है कि बुश की नीतियों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में धूमिल हुई अमेरिका की छवि को सुधारने का वे हर संभव प्रयास करेंगे। शपथ ग्रहण समारोह में ओबामा ने कहा था कि अपनी सैन्य ताकत के बल पर अमेरिका को मनमानी करने का हक नहीं है।
ग्वांतनामो के कैदियों को यातना देने की नीति को एक और झटका तब लगा, जब बुश के ही एक अधिकारी ने कबूल किया कि जिन कैदियों को यातना देकर सबूत जमा किए गए, उनके खिलाफ आतंकी होने का मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। ग्वांतनामो बे की न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी एक अधिकारी सूसन क्राफोर्ड ने मोहम्मद अल कहतानी नामक कैदी के खिलाफ पूछताछ के तरीकों को अवैध करार देते हुए कहतानी के खिलाफ मुकदमा रोक देने की घोषणा की है। कहतानी 9/11 के विमान अपहरण में शरीक होने के लिए अमेरिका आना चाहता था, लेकिन उसे वीजा नहीं मिला। बाद में उसे अफगानिस्तान में पकड़ा गया और ग्वांतनामो लाया गया।
जांच निष्कर्ष में क्राफोर्ड ने कहा है कि सऊदी अरब के नागरिक को कई तरह से शारीरिक यातनाएं दी गईं। क्राफोर्ड के अनुसार ये क्रूर तरीके डोनाल्ड रम्सफेल्ड ने मंजूर किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में फैसला दिया था कि रम्सफेल्ड के नेतृत्व में बना मिलिट्री कमिशन संविधान की भावनाओं के अनुरूप नहीं था और यह जिनीवा कन्वेंशन का उल्लंघन था।
क्राफोर्ड मानती हैं कि कहतानी एक खतरनाक मुजरिम है और उसे यूं ही नहीं छोड़ देना चाहिए, लेकिन यह निर्णय प्रेजिडंट ओबामा को करना होगा। ओबामा ग्वांतनामो को बंद करेंगे, लेकिन उन खतरनाक कैदियों के बारे में भी फैसला करेंगे जिनके खिलाफ संदेह पैदा करने वाले सबूत मौजूद हैं। ग्वांतनामो में अब 245 कैदी बचे हुए हैं, जिन्हें या तो उनके देश वापस भेजा जाएगा या उन्हें अमेरिकी जेलों में स्थानांतरित कर उन पर मुकदमे चलाए जाएंगे।
ओबामा को उन कानूनी पेचीदगियों को भी सुलझाना पडे़गा, जो बुश प्रशासन के दौरान हुई घटनाओं के कारण पैदा हुई हैं। यदि आधिकारिक तौर पर यह माना जाए कि ग्वांतनामो में कैदियों को यातना दी गई थी, तो सवाल उठेगा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है। अगर ओबामा ने सचाई जानने के लिए जांच कमिटी बिठाई, तो उंगली जॉर्ज बुश की तरफ भी उठ सकती है। फिर शायद अबू गरीब का मामला भी उठे। सबूतों का सिलसिला अगर बुश तक पहुंचता है, तो सवाल उठेगा कि क्या ओबामा बुश को कठघरे में खड़ा होने पर मजबूर करेंगे?
फिलहाल तो ओबामा के सामने देश की बिगड़ती हुई आर्थिक स्थिति सबसे अहम मुद्दा है। अमेरिका में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, जिससे राहत दिलाने के लिए ओबामा 850 अरब डॉलर की सरकारी राहत योजना कांग्रेस से पारित कराने में जुटे हैं। ऐसी स्थिति में पूर्व राष्ट्रपति को कानून के दायरे में ला पाना एक मुश्किल काम होगा। फिलहाल तो पेंटागन इस कोशिश में है कि ग्वांतनामो को बंद करने का टाइम टेबल कैसे तैयार किया जाए।

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