Tuesday, January 6, 2009

निष्ठा संविधान के प्रति

Published in 06 Jan-2009 Print Edition of Naidunia


हाल ही में अमेरिका के इलिनोइस प्रदेश और भारत के उत्तर प्रदेश में दो ऐसी घटनाएं घटीं जो दोनों देशों की लोकतांत्रिक व्यवस्था का असली चेहरा सामने लाती हैं। गत माह अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई ने इलिनोइस के गवर्नर राड ब्लागोजेविच को इस आशंका पर गिरफ्तार किया कि ब्लागोजेविच अमेरिकी सीनेट का उम्मीदवार नियुक्त करने के बदले लाखों डॉलर वसूलने वाले थे।राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवार बनने के पहले बराक ओबामा इलिनोइस प्रदेश के शिकागो शहर से अमेरिकी सीनेट के सदस्य चुने गए थे। राष्ट्रपति पद के चुनाव में विजयी होने के बाद उन्हें सीनेट का पद छोड़ना पड़ा। इस खाली हुई सीनेट सीट पर नया उम्मीदवार चुनने की जिम्मेदारी इलिनोइस प्रदेश के गवर्नर राड ब्लागोजेविच की थी जिसकी भ्रष्ट आदतों से अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई भलीभांति परिचित थी। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ओबामा की सीनेट सीट खाली हुई तो गवर्नर को फोन पर यह कहते सुना गया कि "इस सीट को मैं मुफ्त में नहीं जाने दूंगा।" गवर्नर ब्लागोजेविच को सीनेट की सीट को नीलाम करने के आरोप में एफबीआई ने उन्हें सुबह-सवेरे उनके घर जाकर गिरफ्तार किया। अब भारत का एक वाकया देखें। उत्तर प्रदेश में एक सरकारी कर्मचारी, पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियर, की हत्या के आरोप में मुख्यमंत्री मायावती की पार्टी के एक विधायक को गिरफ्तार किया गया। मायावती वह नेता हैं जो लोगों से खुलेआम चंदा मांगती हैं अपने जन्मदिन के लिए। भारत के सबसे बड़े प्रदेश में अगर पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियर ने सत्तारूढ़ दल के मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर ५० लाख रुपए की रकम चंदे में दी होती तो उसकी मौत न होती, न ही भ्रष्टाचार की यह खबर सामने आती।अमेरिका के लोकतंत्र और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में फर्क शायद यह भी है कि भ्रष्टाचार के प्रति दोनों देशों का प्रशासन अलग-अलग रास्ते अपनाता है। इलिनोइस प्रदेश के गवर्नर राड ब्लागोजेविच डेमोके्रटिक पार्टी के उभरते सितारे के रूप में जाने जाते थे। शिकागो शहर में ब्लागोजविच के भ्रष्ट तरीके काफी दिनों तक छुप न सके। उनके नवीनतम कारनामे उनका राजनीतिक जीवन ठप्प करने के लिए काफी हैं। इलिनोइस की विधायिका ब्लागोजेविच के खिलाफ महाभियोग (इंपीचमेंट) लाने वाली है।भारतीय संविधान में भी राजनेताओं की जांच की व्यवस्था है। यहां बिहार के चारा घोटाला की याद आती है जिसमें सीबीआई ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को मुख्य आरोपी करार दिया था। कई बार जेल की हवा खाने के बावजूद लालू आज भारत सरकार में एक वरिष्ठ मंत्री हैं। एक सुलझे हुए लोकतंत्र में इसकी गुंजाइश नहीं होती। भारत में यदि लोकतंत्र की जड़ें गहरी करनी हैं तो सरकारी अधिकारियों में संविधान के प्रति निष्ठा पैदा की जाए, सत्तारूढ़ दलों के प्रति नहीं।

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