Friday, May 21, 2010

घर वापसी

नव भारत टाइम्स, दिल्ली में फरवरी २०१० में प्रकाशित:
एक महीने बाद अमेरिका लौटने को क्या कहूं? 'होमेकामिंग'? भारत का दौरा भी तो 'होमेकामिंग' ही था. दशकों बाद मित्रो से मिला. अपने भाई-बहनों से मिला. सभी ने अपना ही तो समझ कर स्वीकार किया. चढ़ती उम्र की घोषणा करते मुखमंडल मुस्कान से चौड़े दिखे. पुराने मतभेदों को भूला कर अपने घर आने के न्योते दिए. सचमुच अपने घर लौटा था. प्रगति और आतंकवाद से प्रताड़ित अपने देश भारत में.
लेकिन एक माह के प्रवास के बाद कुछ याद आने लगा. दिल्ली से नेवार्क की पंद्रह घंटों की नॉन स्टॉप हवाई यात्रा के दौरान मालूम हुआ कि न्यू जर्सी में बहुत बर्फ गिरी है. इसका मतलब है घर के बाहर सफ़ेद बर्फ की एक परत जम गयी होगी. घर के किनारे खड़ी दोनों कारें बर्फ से ढक गयी होंगी. चिंता इस बात की हुई कि पादचारी मार्ग का जो हिस्सा मेरे घर से गुजरता है उसे किसने बर्फ मुक्त किया होगा? अमेरिका में अपने घरों के बाहर सार्वजनिक पगडंडियों को साफ़ रखना कानूनी जिम्मेदारी है वरना कोई फिसल कर घायल हो गया तो मुक़दमा ठोकना उसका हक बन जाता है.
एअरपोर्ट से बाहर आते ही देखा सडकों पर बर्फ की परत अभी पिघली नहीं है. रात के अँधेरे में टैक्सी स्टैंड से एडिसन जाने के लिए टैक्सी में बैठा. चालक एक अश्वेत नौजवान था. आगे की सीट पुराने कागजों के पुलिंदे से भरी थी--लापरवाह घर की तरह जिसमे कोई सामान अपनी जगह पर नहीं होता. अश्वेत टैक्सी वाले की अस्त व्यस्त गाड़ी देखकर मिथक से भरे दिमाग में अनहोनी सोच परेशान करने लगी. मन घबरा गया कि कहीं वह पड़ोस के उन मुहल्लों में न ले जाये जो अपराधिक घटनाओं के लिए बदनाम हैं. मार्टिन लूथर किंग के इस देश में आज भी अपराध और अपराध से जुडी बस्तिओं को काले लोगों के साथ जोड़ने की भूल की जाती है. हर अवधारण सही नहीं हो सकती! मन को समझाते हुए मैंने नौजवान ड्राईवर से बातचीत के ज़रिये जुड़ना चाहा.
टैक्सी चालक को अपनी बातों में उलझाते हुए उसे बताया पंद्रह घंटो की हवाई यात्रा कितनी थकान भरी होती है. उसने वाव (wow ) के सिवा कुछ नहीं कहा. रैप म्यूजिक का कैसेट लगा कर गाड़ी चलता रहा. कई जगह रास्ता भूला तो मैंने दुरुस्त किया, उसने थैंक यू कहा और आगे बढ़ता रहा.
घर के बहार बर्फ का अम्बार... काले युवक ने सामान बर्फ पर रख दिया. पगडंडी साफ़ थी. किसने किया? दोनों तरफ के पडोसी तो श्वेत हैं. भारत यात्रा के पूर्व उनको बता भी नहीं सका था कि घर का ध्यान रखना. यहाँ पडोसिओं को अपनी यात्रा के बारे में बताने का रिवाज़ नहीं है. दाहिने तरफ की पड़ोसन, डायना, जिसके घर एक बार सिर्फ मिठाई देने गया था और उसने तीन बार आभार व्यक्त किया था, हर सोमवार को मेरे घर के बाहर रखा कचरे का डब्बा, जब मुनिसिपल्टी ट्रक खली कर जाता है, तो उसे उठा कर मेरे घर के पिछवाड़े रखने का काम करती है. बाएँ तरफ का पडोसी जेम्स, जब मेरी पत्नी घास काटने की मशीन चला नहीं पाती , बिना बुलाये आकर मदद करता है. आश्चर्य किन्तु सत्य: मेरे दोनों पड़ोसियों में से किसी ने मेरे घर के बाहर बर्फ की सफाई कर दी थी. श्वेत पडोसिओं को अश्वेत पडोसी अच्छे नहीं लगते. यह मिथक भी गलत साबित हुआ.
सोचता हूँ बर्फ साफ़ करने के लिए मदद की ज़रुरत होगी. किसी प्रोफेसनल को बुलाना होगा. कम से कम सौ डोलर खर्च होंगे. गाड़ियों की छत से बर्फ निकालना मेरे वश की बात नहीं. डिरेक्टरी से नम्बर ढूंढ कर फ़ोन लगाया. कितना लोगे? उसने पूछा कितना काम है? मैंने कहा: इतना ही कि आधे घंटे में हो जाये और मैं चालीस डोलर दूंगा, नगद. वह तैयार हो गया. दूसरी भ्रान्ति भी गलत. अमेरिकी व्यापारी हमेशा ओवर चार्ज करते है, यह सही नहीं.
ठंड के मौसम में गाड़ी चालू हालत में हो तो ज़िन्दगी सामान्य ढर्रे पर चल निकलती है. मेरी ज़िन्दगी को एक महीने बाद नियमित करना था. भारत जाने के पहले डाक घर को सूचित कर आया था कि एक महीने तक मेरी चिट्ठियां पोस्ट ऑफिस में ही रखे. आज जाकर सभी पुराने डाक लाने होंगे. लेकिन जाऊँगा कैसे? गाड़ी तो बंद है. 'ट्रिपल ए' यानि अमेंरिकन ओटोमोबिल एसोसिएसन का मेम्बरशिप आज ही के लिए तो बना है. गाड़ी बंद हो तो बुलाओ, जम्प लगा कर चालू कर देता है. कोई खर्च नहीं. और यह सब अकेले ही करना है. पडोसी से यह सब बताने का रिवाज़ नहीं है यहाँ.